उड़न तश्तरी (अन्तरिक्ष)
कुछ ऐसी दिखाई देने वाली वस्तुओं को उड़न तश्तरी कहा जाता है।
उड़न तश्तरी आकाश में उड़ती किसी अज्ञात उड़ती वस्तु (यूएफओ (UFO))
को कहा जाता है। इन अज्ञात उड़ती वस्तुओं का आकार किसी डिस्क या तश्तरी के
समान होता है या ऐसा दिखाई देता है, जिस कारण इन्हें उड़न तश्तरीयों का
नाम मिला। कई चश्मदीद गवाहों के अनुसार इन अज्ञात उड़ती वस्तुओं के बाहरी
आवरण पर तेज़ प्रकाश होता है और ये या तो अकेले घुमते हैं या एक प्रकार से
लयबद्ध होकर और इनमें बहुत गतिशीलता होती है। ये उड़न तश्तरीयाँ बहुत छोटे
से लेकर बहुत विशाल आकार तक हो सकतीं हैं।[
इतिहास
उड़न
तश्तरी शब्द १९४० के दशक में निर्मित किया गया था और ऐसी वस्तुओं को
दर्शाने या बताने के लिए प्रयुक्त किया गया था जिनके उस दशक में बहुतायत
में देखे जानें के मामले प्रकाश में आए। तब से लेकर अब तक इन अज्ञात
वस्तुओं के रंग-रूप में बहुत परिवर्तन आया है लेकिन उड़न तश्तरी शब्द अभी
भी प्रयोग में है और ऐसी उड़ती वस्तुओं के लिए प्रयुक्त होता है जो दिखनें
में किसी तश्तरी जैसी दिखाई देती हैं और जिन्हें धरती की आवश्यकता नहीं
होती।
वर्तमान स्थिति
उड़न
तश्तरीयों के अस्तित्व को आधिकारिक तौर पर दुनिया भर की अधिकांश सरकारों
द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है, लेकिन कुछ गवाह उड़न तश्तरीयों के देखे
जाने का दावा करते हैं। इनके देखे जाने के बहुत से रिकॉर्ड दर्ज किए गए
हैं। ऐसा माना जाता है की इन उड़ती वस्तुओं का संबंध परग्रही दुनिया से है
क्योंकि इनके संचालन की असाधारण और प्रभावशाली क्षमता मनुष्यों द्वारा
प्रयुक्त किसी भी उपकरण से बिल्कुल मेल नहीं खाती, चाहे वह सैन्य उपकरण हों
या नागरिक वह बिल्कुल अलग दिखती है
आकार और बनावट
यू॰एफ॰ओ
उड़न तश्तरीयों को अन्य यू॰एफ॰ओ समझ लेना एक आम बात है। जैसे इरिडियम
नक्षत्र की निचली घुमावदार कक्षाओं में घूमते कृत्रिम उपग्रह और पृथ्वी के
चारों ओर तेज़ गती से चक्कर लगाते जीपीएस के उच्च घुमावदार परिसंचारी, जो
अपने पैनलों द्वारा सूर्य के प्रकाश को प्रतिबिंबित करते हैं जो विद्युत
ऊर्जा के उत्पादन में प्रयोग किया जाता है, लेकिन इस उत्सुकता के पीछे एक
छोटा चमकदार बिन्दु है जो शाम से लेकर लगभग रात ८ से ९ बजे तक किसी के
द्वारा भी देखा जा सकता है।
देखे जाने की घटनाएँ
३१ जुलाई १९३१ को न्यू जर्सी, अमेरिका में एक अभिकथित उड़न तश्तरी का खींचा गया छायाचित्र।
मानव इतिहास के प्राचीन काल से ही उड़न तश्तरीयों के देखे जाने के
प्रतिवेदन हैं, लेकिन ये पिछले ५०-६० वर्षों में अधिक प्रकाश में आई हैं।
इनके अध्ययन को यूफ़ोलॉजी कहा जाता है। ये वे लोग होते हैं जो इस प्रकार के
घटनावृत की खोज करते हैं। अन्य वस्तुएं जिन्हें उड़न तश्तरी समझ लिया जाता
है, वे हैं: आपातकालीन झंडे, मौसमी गुब्बारे, उल्काएं, चमकदार बादल
इत्यादि।
अमेरिका के पेंसिलवेनिया
राज्य में पीट्सबर्ग से ६४ किमी दूर दक्षिण पूर्व में केक्सबर्ग के जंगलों
के उपर एक अज्ञात वस्तु बहुत देर तक मंडराती रही। जिसने इसे देखा वो देखता
ही रह गया। लेकिन देखते देखते ये अज्ञात वस्तु आग की लपटों से घिर गई। फिर
इसमें एक भयंकर विस्फोट हुआ। आसपास का क्षेत्र हिल उठा। इस घटना के तुरंत
बाद इस क्षेत्र को घेर लिया गया। और किसी को भी वहीं जाने नहीं दिया गया।
बाद में उड़न तश्तरी की बात सामने आई। हालांकि नासा ने इसे उल्का पिंड का नाम दिया।[2]
रूस के इतिहास में 1989 का साल काफी दिलचस्प रहा है। इस साल यहां कई बार यूएफओ देखे जाने की खबर मिली थी।[3]
सबसे पहले 14 अप्रैल के दिन चेरेपोवेस्क के इवान वेसेलोवा ने बहुत बड़ा
यूएफओ देखने का दावा किया। फिर 6 जून के दिन कोनेंटसेवो में बहुत से बच्चों
ने ऐसा दावा किया। 11 जून के दिन वोलागडा की एक महिला ने 17 मिनट तक उड़न
तश्तरी देखने की बात कही। एक और मामले में करीब 500 लोगों ने ऐसा दावा
किया। सबसे ज्यादा रोमांचक किस्सा 17 सितंबर 1989 का है। इस दिन वोरोनेज़
के एक पार्क में बच्चे खेल रहे थे। ऐसे में बहुत बड़ा लाल रंग का अंडाकार
यान उतरा था। देखते ही देखते वहां बहुत से लोग जमा हो गए। कुछ देर बाद यान
में से दो एलियन निकले। एक करीब 12 से 14 फीट लंबा था और उसकी तीन आंखें
थीं। दूसरा रोबोट जैसा लग रहा था। बच्चे उसे देखकर चीखने लगे तो उसने एक
बच्चे पर लाइट की बीम छोड़ी और बच्च लकवे जैसी स्थिति में पहुंच गया। उस
जगह की रिसर्च करने पर वहां मिट्टी में रेडिएशन के निशान मिले। वहां
फॉस्फोरस की मात्रा ज्यादा पाई गई। वैज्ञानिकों के अनुसार यूएफओ का वजन कई
टन था।
१९९१ में एलिटालिया विमान सेवा के एक यात्री विमान ने उड़न तश्तरी का
दर्शन काफी समिप से किया था। बीबीसी के मुताबिक इटली के राष्ट्रीय
अभिलेखागार की ओर से जारी रक्षा मंत्रालय के गोपनीय दस्तावेजों में इस बात
का वर्णन दिया गया है।[4]
रूस में तिकोने आकार की दूसरे ग्रह से आई एक उड़नतश्तरी के कारण रूसवासी
हैरत में पड़ गए थे। डेली मेल के अनुसार, यह उड़नतश्तरी कथित तौर पर ९
दिसम्बर २००९ को दिखाई दी। इसी दिन नार्वे के आसमान में नीले रंग का
वृत्ताकार प्रकाश देखा गया था लेकिन बाद में बताया गया कि यह रूस से
प्रक्षेपित एक असफल रॉकेट था।[5]
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